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Raghwendra Nagar's blog

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डालर-रूपये का असंतुलन देश के लिए हानिकारक

देशवासिओं मात्र एक ईस्टइंडिया कम्पनी ने देश को गुलाम बना दिया ,अब १३०० से भी अधिक विदेशी कम्पनियां है क्या हाल होगा ? एक डालर =६० रूपये कहाँ पहुँचगये हम ?सीधा अर्थ है हम आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ रहें है | इससे मुक्ति का उपाय स्वदेशी अपनाओ है जो कोई नहीं मन रहा ,मात्र कोका कोला-पेप्सी छोड देने मात्र से एक दिन में करोंड़ों डालर बच जायेंगे |

पहले स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी ऐसा ही कार्यक्रम चलाते थे ,उनका अनुसरण जनसंघ हिंदू महासभा , भा.ज.पा. ने किया अब सब भूल गये |आईये फिर से स्वदेशी अपनाने का नारा दें उठना -बैठना -नहाना -धोना -चलना -फिरना -खाना -पीना -रहना -सोना मै स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करें |

युवाओं पर इसका सीधा असर होना देश हित मै होगा तब देखिए डालर कितना नीचे आ जाता है |

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अपने पुत्र-पौत्र-प्रपोत्रों के हित में ...

जिन सज्जनों की आयु ५० वर्ष से ७० वर्ष के मध्य है वह जानते होंगे कि प्रकृति ने  काशीपुर एवं उसके आस पास उपहार स्वरुप कई नदियाँ, नहरें, झीलें, ताल, तालाब,  कुएं आदि दिए थे यह भी ध्यान होगा की शहर के बीचों बीच बहने वाला गन्दा नाला  किसी समय साफ़ सुथरे जल की नहर थी जिसका जल पीने के कार्य एवं घर के कार्यों  में प्रयुक्त किया जाता था, परन्तु आज तालाबों, झीलों को पाट दिए जाने से कुएं सूख गएँ हैं, कटोराताल भी पाट दिया गया जिस कारण से भूमि जल स्तर काफी गिर गया है नदियों के जल को फक्ट्रियों के गंदे पानी ने प्रदूषित कर दिया है, शहर में अब दो बड़े ताल रह गएँ हैं १) द्रोणासागर २) गिरीताल जो कि वर्तमान में एतिहासिक एवं पर्यावरण  दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण हैं !

द्रोणासागर को तीर्थ का दर्जा प्राप्त है परन्तु कई कारणों से वह उपेक्षित है जिसमे कभी प्रकृति से प्राप्त लबालब जल  भरा रहता था, कछुए, पातळ और अन्य जल जीव इसकी शोभा बढाते थे, परन्तु अब यह जनता, प्रशासन, शासन की घोर उपेक्षा से जल का स्रोत न रहकर कुछ भी नहीं रह गया है !

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