आम चुनाव

आते हुए आम चुनाव को देखकर

हमारे मन में भी विचार आया

क्यों ना हम भी चुनाव लड़े

और राजनीती के chetra में ही आगे बढे

यदि जीत गए तो नाम और पैसा दोनों कमाएंगे

किन्तु दुर्भाग्य से यदि हार गए तो चुनाव तो हर साल हो रहे है

दुबारा भाग्य आजमाएंगे

कुछ sochkar घबराये

की जनता हमें कैसे स्वीकारेगी

अनुभव-हीन समझकर कही पत्थर तो नहीं मारेगी

फिर ये सोचकर ह्रदय को धाडस बंधाया

की आजकल डाकू, गुंडे सभी तो नेता बन रहे है

हमारी छवि तो साफ़ सुथरी है

हम तो नाहक ही डर रहे है

हिन्दू को मुस्लमान से लड़वायेंगे

ईसाईयों पर हमले करवाएंगे

सिख तो अपने आप ही मान जायेंगे

इस प्रकार आने वाला आम चुनाव हम बड़ी आसानी से जीत जायेंगे

ऐसा सूचकर हमने अपने आदर्शो की सारी सीमाए tod दी

और राजनीती की नदी में अपने जीवन की नाव छोड़ दी

आब हम भूंको से रोटी, नंगो से कपरे और

बेरोजगार से रोज़गार के नाम पर वोते mang रहे थे

कुछ kattarpanthiyo के सामने राम औरअल्लाह को भी ला रहे थे

और अपनेसभी चुनावी बशानो को समाज की

सभीबुरइयो से सजा रहेथे

गरीबोपर ज़ुल्म करवाकर

खुदजाकर उस पर मर हम लगा रहेथे.

इसप्रकार समाज के हर वर्ग में अपनी झूटी धाक जमा रहेथे

अचानकहमारी नजर हमारे हमशकल परपड़ी

जोइतनी भीड़ में जोर जोर से चीख रहाथा

हमेंकुछ अपना सा दीख रहाथा

होतो मई ही, पर फटे हाल

सूखेहूठ और गड्ढे पड़ेगाल

शारीरथा की पूराकंकाल

मईबोला, तुम कौनहो? अभी चीख रहे थे आब क्यों मौनहो?

इसबार वो सुबकनेलगा

कंपकपातेहूतो से कहनेलगा

मईतुम्हारा जमीरहूँ

वोतेमांगना है तो पहले मुझसेmअंगो

मईवोते उसे दूंगा जो भाई को भाई से नालड़ाए

देशको विनाश नही, विकास की रह पर लेजाये

भारतमाँ के शहीदों के खून के खून का हिसाब रखसके

जिसकेरहते दुश्मन सीमा पर ना कदम रखसके

Use में Vot ही क्या अपनी जान भीदूंगा

अपनीजान भीदूंगा

अपनीजान भीदूंगा........